मुनव्वर राना शायरी – उसे भी खिड़कियाँ खोले ज़माना

उसे भी खिड़कियाँ खोले ज़माना बीत गया..
मुझे भी शाम-ओ-सहर का पता नहीं चलता … – मुनव्वर राना