मुनव्वर राना शायरी – ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं

ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ
महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है – मुनव्वर राना