मुनव्वर राना शायरी – घरों में यूँ सयानी बेटियाँ

घरों में यूँ सयानी बेटियाँ बेचैन रहती हैं
कि जैसे साहिलों पर कश्तियाँ बेचैन रहती हैं – मुनव्वर राना