मोमिन ख़ाँ मोमिन शायरी – थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब – मोमिन ख़ाँ मोमिन