मोमिन ख़ाँ मोमिन शायरी – शब-ए-विसाल है गुल कर दो

शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को
ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का – मोमिन ख़ाँ मोमिन