वसीम बरेलवी शायरी – ग़लतफहमी की गुंजाईश नही सच्ची

ग़लतफहमी की गुंजाईश नही सच्ची मुहब्बत मे
जहाँ किरदार हल्का हो कहानी डूब जाती है – वसीम बरेलवी