वसीम बरेलवी शायरी – नयी उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को

नयी उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है – वसीम बरेलवी