वसीम बरेलवी शायरी – बहोत बेबाक़ आँखो मे तअल्लुक़

बहोत बेबाक़ आँखो मे तअल्लुक़ टीक नही पाता
मोहब्बत मे कशिश रखने को शर्माना ज़रुरी है – वसीम बरेलवी