वसीम बरेलवी शायरी – यही तय जानकर कूदो उसूलों

यही तय जानकर कूदो, उसूलों की लड़ाई में
कि रातें कुछ न बोलेंगी, चरागों की सफाई में – वसीम बरेलवी