शाद अज़ीमाबादी शायरी – अब इंतिहा का तिरे ज़िक्र

अब इंतिहा का तिरे ज़िक्र में असर आया
कि मुँह से नाम लिया दिल में तू उतर आया – शाद अज़ीमाबादी