शाद अज़ीमाबादी शायरी – काबा ओ दैर में जल्वा

काबा ओ दैर में जल्वा नहीं यकसाँ उन का
जो ये कहते हैं टटोले कोई ईमाँ उन का – शाद अज़ीमाबादी