शाद अज़ीमाबादी शायरी – ख़मोशी से मुसीबत और भी

ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है
तड़प ऐ दिल तड़पने से ज़रा तस्कीन होती है – शाद अज़ीमाबादी