शाद अज़ीमाबादी शायरी – भरे हों आँख में आँसू

भरे हों आँख में आँसू ख़मीदा गर्दन हो,
तो ख़ामुशी को भी इज़हार-ए-मुद्दआ कहिए ! – शाद अज़ीमाबादी