साग़र सिद्दीक़ी शायरी – कल जिन्हें छु नहीं सकती

कल जिन्हें छु नहीं सकती थी फ़रिश्तों की नज़र
आज वो रौनक़ ~ए~बाज़ार नज़र आते हैं .. – साग़र सिद्दीक़ी