साग़र सिद्दीक़ी शायरी – ग़म के मुजरिम ख़ुशी के

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं
लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं! – साग़र सिद्दीक़ी