साग़र सिद्दीक़ी शायरी – चराग़-ए-तूर जलाओ बड़ा अंधेरा है

चराग़-ए-तूर जलाओ बड़ा अंधेरा है
ज़रा नक़ाब उठाओ बड़ा अंधेरा है – साग़र सिद्दीक़ी