साग़र सिद्दीक़ी शायरी – देखी जो रक़्स करती हुई

देखी जो रक़्स करती हुई मौज-ए-ज़िंदगी
मेरा ख़याल वक़्त की शहनाई बन गया – साग़र सिद्दीक़ी