साग़र सिद्दीक़ी शायरी – मैं आदमी हूँ कोई फ़रिश्ता

मैं आदमी हूँ कोई फ़रिश्ता नहीं हुज़ूर
मैं आज अपनीज़ातसे घबराके पी गया – साग़र सिद्दीक़ी