हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
कहीं ऐसा न हो जाए कहीं वैसा न हो जाए – हफ़ीज़ जालंधरी