हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – क्यूँ हिज्र के शिकवे करता

क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है
अब इश्क़ किया तो सब्र भी कर इस में तो यही कुछ होता है – हफ़ीज़ जालंधरी