हफ़ीज़ जालंधरी शायरी – जिस ने इस दौर के

जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा
वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं – हफ़ीज़ जालंधरी