ज़फ़र इक़बाल शायरी – कैफ़ियत ही कोई पानी ने

कैफ़ियत ही कोई पानी ने बदल ली हो कहीं
हम जिसे दश्त समझते हैं वो दरिया ही न हो – ज़फ़र इक़बाल