ज़फ़र इक़बाल शायरी – ख़ामोशी अच्छी नहीं इंकार होना

ख़ामोशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए,
ये तमाशा अब सर-ए-बाज़ार होना चाहिए। – ज़फ़र इक़बाल