अहमद फ़राज़ शायरी – दिल के रिश्तों कि नज़ाक़त

दिल के रिश्तों कि नज़ाक़त वो क्या जाने ‘फ़राज़’,
नर्म लफ़्ज़ों से भी लग जाती हैं चोटें अक्सर!! – अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़ शायरी – यूँही मौसम की अदा देख

यूँही मौसम की अदा देख के याद आया है
किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ – अहमद फ़राज़

हसरत मोहानी शायरी – दावा-ए-आशिक़ी है तो ‘हसरत’ करो

दावा-ए-आशिक़ी है तो ‘हसरत’ करो निबाह
ये क्या के इब्तिदा ही में घबरा के रह गए – हसरत मोहानी