परवीन शाकिर शायरी – अक्स ए खुश्बू हूँ

अक्स ए खुश्बू हूँ
बिखरने से
न रोके कोई…
और
बिखरुँ भी तो
मुझ को
न समेटे कोई… – परवीन शाकिर