परवीन शाकिर शायरी – दिल को उस राह पे

दिल को उस राह पे चलना ही नहीं
जो मुझे तुझ से जुदा करती है
ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है – परवीन शाकिर