बशीर बद्र शायरी – ख़्वाब इन आंखों से अब

ख़्वाब इन आंखों से अब कोई चुरा कर ले जाए
क़ब्र के सूखे हुए फूल उठा कर ले जाए
मुंतज़िर फूल में ख़ुशबू की तरह हूँ कब से – बशीर बद्र