बशीर बद्र शायरी – ज़िन्दगी तिरी फ़िक्रें खिलते ही

ज़िन्दगी तिरी फ़िक्रें खिलते ही गुलाबों का
रस निचोड़ लेती हैं
फूल जैसी उम्रों के सोचते हुए बच्चे
बूढ़े होते जाते हैं – बशीर बद्र