साग़र सिद्दीक़ी शायरी – जिस अहद में लुट जाए

जिस अहद में लुट जाए फ़क़ीरों की कमाई
उस अहद के सुल्तान से कुछ भूल हुई है – साग़र सिद्दीक़ी