साग़र सिद्दीक़ी शायरी – झिलमिलाते हुए अश्कों की लड़ी

झिलमिलाते हुए अश्कों की लड़ी टूट गई
जगमगाती हुई बरसात ने दम तोड़ दिया! – साग़र सिद्दीक़ी