बशीर बद्र शायरी – अजीब शख़्स है नाराज़ होके

अजीब शख़्स है नाराज़ होके हंसता है
मैं चाहता हूँ ख़फ़ा हो तो वो ख़फ़ा ही लगे – बशीर बद्र

बशीर बद्र शायरी – काम ले कुछ हसीन होंठो

काम ले कुछ हसीन होंठो से,
बातों-बातों मे मुस्कुराया कर.

धूप मायूस लौट जाती है,
छत पे किसी बहाने आया कर. – बशीर बद्र

बशीर बद्र शायरी – ज़िन्दगी तू मुझे पहचान न

ज़िन्दगी तू मुझे पहचान न पाई लेकिन
लोग कहते हैं कि मैं तेरा नुमाइंदा हूँ – बशीर बद्र