दुष्यंत कुमार शायरी – कैसे आकाश में सूराख़ नहीं

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ’त से उछालो यारो – दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार शायरी – रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा

रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया
इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो – दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार शायरी – जिसे मै ओढता बिछाता हूं

जिसे मै ओढता बिछाता हूं
वही गज़ल तुम्हे सुनाता हूं
एक जंगल है तेरी आंखो मे
मै जहां राह भूल जाता हूं – दुष्यंत कुमार