हसरत मोहानी शायरी – एक तुम हो कि वफा

एक तुम हो कि वफा तुमसे न होगी, न हुई,
एक हम कि तकाजा न किया है, न करेंगे….!! – हसरत मोहानी

हसरत मोहानी शायरी – न असर आह में कुछ

न असर आह में कुछ है न दुआ में तासीर
तीर हम जितने चलाते हैं ख़ता होते हैं – हसरत मोहानी

हसरत मोहानी शायरी – दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर

दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर दिया आज़ाद
तिरे जुनूँ का ख़ुदा सिलसिला दराज़ करे – हसरत मोहानी