जिगर मुरादाबादी शायरी – आदमी के पास सब कुछ

आदमी के पास सब कुछ है मगर,
एक तन्हा आदमिय्यत ही नहीं…!! – जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी शायरी – तिरी ख़ुशी से अगर ग़म

तिरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई
वो ज़िंदगी तो मोहब्बत की ज़िंदगी न हुई – जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी शायरी – सदाक़त हो तो दिल सीनों

सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़
हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती – जिगर मुरादाबादी