मुनव्वर राना शायरी – झुक के मिलते हैं बुजुर्गों

झुक के मिलते हैं बुजुर्गों से हमारे बच्चे
फूल पर बाग़ की मिट्टी का असर आता है – मुनव्वर राना

मुनव्वर राना शायरी – हम बहुत खुश हैं उसे

हम बहुत खुश हैं उसे दे के इबादत का फ़रेब
वो मगर ख़ूब समझता है ख़ुदा है वह भी – मुनव्वर राना

मुनव्वर राना शायरी – ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं

ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ
महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है – मुनव्वर राना