राहत इंदौरी शायरी – वो जो मुंसिफ़ है तो

वो जो मुंसिफ़ है तो क्या कुछ भी सज़ा दे देगा
हम भी रखते हैं ज़ुबाँ, पहले ख़ता पूछेंगे – राहत इंदौरी

राहत इंदौरी शायरी – हादसे राह में ज़ंजीर बक़फ

हादसे राह में ज़ंजीर बक़फ हैं लेकिन,
मंज़िलों का ये तक़ाजा है के चलते रहिये। – राहत इंदौरी

राहत इंदौरी शायरी – मेरा जमीर मेरा ऐतबार बोलता

मेरा जमीर मेरा ऐतबार बोलता है
मेरी जुबान से परवरदिगार बोलता है
तेरी जुबान कतरना बहुत जरूरी है
तुझे मर्ज है तू बार-बार बोलता है – राहत इंदौरी