मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – जला है जिस्म जहाँ दिल

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है – मिर्ज़ा ग़ालिब