अहमद फ़राज़ शायरी – ज़िंदगी हम तिरे दाग़ों से

ज़िंदगी हम तिरे दाग़ों से रहे शर्मिंदा
और तू है कि सदा आईना-ख़ाने माँगे – अहमद फ़राज़