अहमद फ़राज़ शायरी – वह लाख दुश्मन ए जां

वह लाख दुश्मन ए जां हो मगर ख़ुदा न करे
के उसका हाल भी हो हू बा हू हमारी तरहा। – अहमद फ़राज़