अल्लामा इक़बाल शायरी – आँख को मानूस है तेरे

आँख को मानूस है तेरे दर-ओ-दीवार से
अज्नबिय्यत है मगर पैदा मिरी रफ़्तार से – अल्लामा इक़बाल