अल्लामा इक़बाल शायरी – ज़मीर जाग ही जाता है

ज़मीर जाग ही जाता है गर ज़िँदा हो “इकबाल”
कभी गुनाह से पहले तो कभी गुनाह के बाद…..!!! – अल्लामा इक़बाल