अल्लामा इक़बाल शायरी – यह दस्तूर ए जुबां बंदी

यह दस्तूर ए जुबां बंदी है कैसा तेरी महफ़िल में
यहाँ तो बात करने को तरसती है जुबां मेरी – अल्लामा इक़बाल