अल्लामा इक़बाल शायरी – हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा – अल्लामा इक़बाल