अल्लामा इक़बाल शायरी – है आशिक़ी में रस्म अलग

है आशिक़ी में रस्म अलग सब से बैठना
बुत-ख़ाना भी हरम भी कलीसा भी छोड़ दे – अल्लामा इक़बाल