बशीर बद्र शायरी – उन्ही दो घरों के करीब

उन्ही दो घरों के करीब ही
कहीं आग ले के हवा भी थी
न कभी तुम्हारी नज़र गयी
न कभी हमारी नज़र गयी – बशीर बद्र