बशीर बद्र शायरी – तेरे और मेरे प्यार में

तेरे और मेरे प्यार में अक्सर; सारे जज्बात मुश्तरक हैं मगर,
धूप कितनी ही मेहरबां हो जाये; वो कभी चाँदनी नही होती…!!! – बशीर बद्र