बशीर बद्र शायरी – नए दौर के नए ख़्वाब

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे – बशीर बद्र