बशीर बद्र शायरी – मुन्तज़र फूल में ख़ुशबू की

मुन्तज़र फूल में ख़ुशबू की तरह हूँ कब से
कोई झोंके की तरह आये उड़ा कर ले जाये – बशीर बद्र