बशीर बद्र शायरी – मैं तमाम दिन का थका

मैं तमाम दिन का थका हुआ, तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर, तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ – बशीर बद्र