बशीर बद्र शायरी – वो फ़िराक़ हो या विसाल

वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो गुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो – बशीर बद्र